शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

भ्रष्ट राजनीतिज्ञों का युवा पीढ़ी पर दुष्प्रभाव

राजनीति का शुद्धकरण

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दागी नेताओं के खिलाफ चल रहे मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए एक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का आदेश दिया गया है। इसमें सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मुकदमों पर जल्द सुनवाई होगी और उम्मीद की गयी है कि फैसले आने में देरी नहीं होगी।


राजनीतिज्ञों पर चल रहे मुकदमों की सुनवाई में ढिलाई और उन्हें सजा मिलने में देरी से कानून व्यवस्था से विश्वास उठना स्वाभाविक है। प्रजातंत्र में नेता एक महत्वपूर्ण अंग होता है, जिसका कर्तव्य लोकहित, जनता की खुशहाली और देश का विकास है। जनता का यह सेवक जनता को नजरअंदाज कर अपनी तिजोरियां भरने लगता है तो देश का अहित होता है।


एक भ्रष्ट नेता का प्रभाव युवा वर्ग पर यह पड़ता है कि उसे नेता बनना डॉक्टर और इंजीनियर बनने से आसान लगता है। युवा राजनीति को रातों-रात अमीर बनने की सीढ़ी मान लेते हैं और राजनीति में जाते हैं। उनके लिए पढ़ाई लिखाई से लेकर शिष्टाचार तक का कोई महत्व नहीं रहता और वह जिसकी लाठी उसी की भैंस का अनुकरण करते दिखाई देते हैं। अपने स्वार्थ के लिए या यूं कहें कि बिना मेहनत कमाई करने के लिए वह सब काम करने लगते हैं जिनमें सामाजिक व्यवस्था का तानाबाना छिन्नभिन्न होने लगता है।
युवाओं को भ्रष्टाचार से परहेज हो, वो भ्रष्ट नेताओं की सराहना करते दिखाई दें, उनके जैसा बनना चाहें और बिना मेहनत कमाई करने को अच्छा समझे। मतलब भ्रष्टाचार से राजनीतिज्ञों की जो पीढ़ी ग्रस्त है उसकी लपेट में युवा पीढ़ी जाने अनजाने आती जा रही है। देश में 65 प्रतिशत आबादी देश के 35 वर्ष तक के युवाओं की है। इन्हें भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए वे सभी उपाए करने जरुरी हैं जिनसे उन्हें भरोसा हो जाए कि इसके साथ शिक्षा, रोजगार और उन्नति के अवसरों को लेकर कोई भेदभाव नहीं होगा।
निर्मला कपिला ने क्या खूब लिखा है
नेता के लिये मिनिमम क्वालिफिकेशन है-


1.पहली जमात से ऊपर पास हो या फेल
2. किसी किसी केस में कम से कम एक बार हुई हो जेल
3. मैथ मे करोडों तक गिनती जरुरी है इस के बिना नेतागिरी अधूरी है
4. माइनस डिविजन चाहे ना आये पर प्लस मल्टिफिकेशन बिना
नेता बनने की चाह अधूरी है
5. सइकालोजी थोडी सी जान ले ताकि वोटर की रग पह्चान ले
6. ड्राईंग में कलर स्कीम का ज्ञाता हो, गिरगिट की तरह रंग बदलना आता हो
7. डाक्टर, इंजनियर बनकर भूखों मर जाओगे
नेता बन कर ही गाडी, बंगला और विदेश जा पाओगे

भ्रष्ट नेता की पहचान

भ्रष्ट नेता अपनी जेबें भरने के बाद भूल जाते हैं  कि इन्होंने जनता से जो वायदे किए, उन्हें पूरा भी करना है। इसलिए उन्हें मौसमी फल कहा गया है जो चुनाव के दिनों में बड़ी आसानी से मिल जाते हैं और चुनाव खत्म होते ही लुप्त हो जाते हैं।


चुनाव जीतने के लिए यह क्या कुछ नहीं करते। लोगों के हाथ पैर छूने से लेकर बूथ लूटने, ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ करने से लेकर वह सब करते हैं जिससे वोट हासिल हो सके।
भ्रष्ट नेताओं की सूची इतनी लंबी है कि जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। ऐसे ही कुछ नामीग्रामी नेता हैं जो कई सालों से करोड़ों के घोटाले या अपराध से जुड़े हैं। 

उदाहरण के तौर पर पॉवर और मनी घोटाला जिसमें शरद पवार का नाम सामने आया लेकिन अपने स्ट्रोंग पोलिटिकल लिंक्स की बदौलत जेल जाने से बच गए। वहीं 4000 करोड़ के कोयला घोटाले में लिप्त झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर अब जा कर फैसला आया है। करूणानिधि, राजा, मायावती, लालू प्रसाद और मुलायम सिंह यादव पर बरसों बरस भ्रष्टाचार के मुकदमें चलने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र में उनकी तूती बोलती है।

भारत में राजनीति, भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों का इतिहास बहुत पुराना है। अंग्रेजों ने भारत के राजे-रजवाड़े और साहूकारों को पैसे देकर उन्हें अपनी ओर शामिल कर लिया साथ ही देश के साथ गद्दारी करने के लिए भी मजबूर कर दिया और देश को दोनों हाथों से लूटा। वहीं से भ्रष्टाचार की शुरुआत हुई और तब से यह फल फूल रहा है।

सोचने वाली बात यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम बनाया गया और समय-समय पर इसमें संशोधन भी होता रहा है लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार खत्म हुआ और भ्रष्ट नेताओं की संख्या कम हुई।
अन्ना हजारे, बाबारामदेव और कई दिग्गजों ने कालाधान, लोकपाल बिल जैसे आन्दोलन चलाकर भ्रष्टाचार खत्म करने की कोशिश की लेकिन कुछ ज्यादा कामयाबी हासिल नहीं कर पाए।


कितने ही कानून बना लें, कितने ही आंदोलन कर लें और कितने ही स्पेशल कोर्ट की स्थापना कर लें लेकिन जब तक कानून व्यवस्था को मजबूती से लागू और उसका ईमानदारी से पालन नहीं होगा तबतक भ्रष्टाचारी नेता चांदी काटते रहेंगे। स्पेशल फास्ट अदालतों  के गठन से एक उम्मीद बंधी है कि भ्रष्ट नेताओं पर चल रहे मुकदमों के जल्द फैसले आएंगे और उनकी जो सही जगह है, उन्हें वहां भेज दिया जाएगा।


नई दिल्ली का जन्मदिन

15 दिसम्बर 1911 को राजधानी के रुप में नई दिल्ली की नींव का पत्थर जॉर्ज पंचम ने किंग्सवे कैम्प में रखा था। उसके बाद आज तक नई दिल्ली ने अनेक रुप बदले, उसमें नई इमारतें जुड़ती चली गईं और दिन प्रतिदिन उसका रुप निखरता गया। एडविन लुटयिन के नाम पर नई दिल्ली को लुटयिन जोन कहने का चलन है। यह तत्कालीन ठेकेदारों, वास्तुकारों और शिल्पकारों की दूरंदेशी का बेहतरीन नमूना है। आज भी लुटयिन जोन को चौड़ी सडकों, शान्त वातावरण और सुखद अहसास देने वाले इलाके के रुप में जाना जाता है।

हलांकि कुछ बंगलों में अतिरिक्त निर्माण से परिवर्तन कर लिए गए हैं लेकिन फिर भी इस क्षेत्र का अपना एक आकर्षण है। धनी हों या राजनेता इस इलाके में निवास को प्राथमिकता देते हैं। नई दिल्ली का निर्माण करने में जिन ठेकेदारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई  उनमें सुप्रसिद्ध लेखक सरदार खुशवंत सिंह के पिता सर सोभा सिंह प्रमुख थे। उनके पिता के नाम पर सुजान सिंह पार्क बेहतरीन शिल्प का नमूना है।



नई दिल्ली को जन्मदिन की शुभकामनाएं और यहां के निवासियों से निवेदन है कि इसके मूल रुप को बरकरार रखें।